इमली तला वृन्दावन 5500 वर्ष पुराना इमली का पेड़ जिसके इमली से ठाकुर जी ने राधा रानी को आलता लगाया था

इमली तला वृन्दावन श्री कृष्ण के समय के इमली के पैर आज भी मौजूद है जिसकी इमली से ठाकुर जी राधा रानी को आलता लगाए थे । वृन्दावन की द्वापर युग की निशानी आज भी मौजूद है यहाँ

इमली तला वृन्दावन में कहां है कैसे जाएं एवं यहां का इतिहास क्या है

इमली तला

इमली तला वृन्दावन में यमुना जी के किनारे बांके बिहारी मंदिर एवं राधाबल्लभ मंदिर से कैसी घाट की तरफ आगे बढ़ने पर बीच में ही स्थित है

इमली तला वृन्दावन की प्राचीन धरोहर में से एक है इमली तला वृन्दावन द्वापर युग से श्री कृष्ण के समय से अभी तक वहां स्थित लगभग 5500 वर्ष पुराना इमली का पेड़ होने की वजह से नाम पड़ा इस इमली की पर की कई अनसुनी इतिहास है इतिहासकारों का मानना है कि यह पेड़ श्री कृष्ण के समय से ही है जहां पर जब राधा रानी महाराष् में से थक गई थी तो आकर यही इमली के पेड़ के नीचे बैठी थी

यह भी कहा जाता है कि जब राधा रानी को श्री कृष्ण की प्रेम भक्ति पर अटूट अहंकार हो गया तब श्री कृष्णा कुछ समय के लिए अंतर ध्यान हो गए थे उसे वक्त राधा रानी उनके बिहार में उसे इमली पेड़ के नीचे बैठकर उनकी यादों में कई दिनों तक

आंसू बहाई करती थी इसलिए यह पेड़  एवं यह स्थान बहुत ही पवित्र स्थान माना गया है। ।। साधु संत कहते हैं कि एक बार ठाकुर जी ने राधा रानी को इसी पेड़ के इमली से अलता लगाया था लेकिन राधा रानी के अलता का रंग कुछ ही समय बाद छूट गया था जिस पर

ठाकुर जी ने नाराज होकर कह दिया था कि आज के बाद इस पेड़ का कोई भी इमली पकेगा नहीं

जबकि वहीं साधु संत का यह भी मानना है कि जब राधा रानी इमली के   पेड़ के पास से गुजर रही थी तो वहां पक्की एक इमली  पर उनका पैर पड़ गया जिसे वह फिसल कर गिर गई एवं नाराज होकर राधा रानी भी इस पर के इमली पर बोली थी कि आज के बाद पेड़  पर लगने वाली कोई भी इमली अब पकेगी नहीं

: श्री चैतन्य महाप्रभु जब वृंदावन आए थे तो सर्वप्रथम उन्होंने अपना भजन कीर्तन एवं साधना इसी इमली तला वृन्दावन के पैर के नीचे बैठकर शुरू की थी इस इमली तल्ला नामक जगह को श्री चैतन्य महाप्रभु ने बहुत ही सुंदर तरीके से संजोग के रखा जो आज हम सभी के लिए श्री ठाकुर जी के समय की अनोखी चीज की दर्शन आज हो पा रही है

इमली तला  पेड़ के काटने से खून बहने लगा था जाने क्या है खौफनाक सच

इमली तला

: कहा जाता है कि एक समय में मुगल के कोई शासक अपने तानाशाही में यह आदेश दिया था कि इमली तला पेड़ की डाल को काट देने के लिए जब उनके मजदूर अपना कुल्हाड़ी लेकर इस पेड़ को काटने आए एवं जब पेड़ के ऊपर चढ़कर जैसे ही डाल पर कुल्हाड़ी का प्रहार किया था वैसे ही इस डाल  से खून टपकने लगा था और यह तीन दिन तक खून टपकती रहा तब जाकर वह मजदूर वहां से वापस लौट गए एवं तब से यहां पर और भी पूजा पाठ होने लगा श्री चैतन्य महाप्रभु ने इस जगह को बहुत ही अच्छे तरीके से प्रसिद्ध कराया

: यदि आप वृंदावन दर्शन करने आए हैं एवं आप वृंदावन की मूल एवं प्राचीन धरोहर की दर्शन करना चाहते हैं तो आप निम्नलिखित कुछ जगहों परअवश्य जाएं

जब आप वृंदावन आए तो बिहारी जी की दर्शन करने के बाद वहां से महज 500 मीटर की दूरी पर सीधी परिक्रमा की ओर आगे बढ़ने पर आपको इमली तला की दर्शन होगी यहां पर जाकर आप ठाकुर जी की समय की इस अद्भुत पेड़ का दर्शन जरूर करें जहां श्री राधा रानी भी बैठा करती थी एवं जिस पर की इमली से ठाकुर जी ने राधा रानी को अलता लगाया था

इसके बाद यदि आप और भी प्राचीन मूल धरोहर की दर्शन कर रहे हैं तो आप मीराबाई मंदिर जरूर जाएं जहां पर मीराबाई 14 वर्ष तक तपस्या की थी यह स्थान बहुत ही प्राचीन है यह जाकर दर्शन जरूर करें बहुत से लोगों को सही जानकारी न होने की वजह से वह वृंदावन तो आते हैं लेकिन वृंदावन की मूल धरोहर की दर्शन किए बिना ही चले जाते हैं उन्हें बस दो-तीन चीजों की ही जानकारी होती है

वृन्दावन में दर्शन करने वाली प्राचीन स्थल

जैसे कि बिहारी जी की मंदिर प्रेम मंदिर एवं के सी घाट बस यही दर्शन करके वह लौट जाते हैं लेकिन जब आप वृंदावन आए तो आप बिहारी जी की मंदिर प्रेम मंदिर के साथ-साथ वृंदावन की मूल प्राचीन मंदिर की जानकारी लेकर दर्शन जरूर करें वृंदावन की मूल प्राचीन मंदिर में राधा दामोदर मंदिर मीराबाई मंदिर इमली तला चिर  घाट गोपेश्वर महादेव की भी दर्शन करना ना भूले

: इसके बाद आप वृंदावन के अनोखी जगह तटीय स्थान दर्शन करने अवश्य जाएं साधु संतों का मानना है कि आज भी इस तटीय स्थान में कलयुग का प्रवेश नहीं हुआ है आप तटीय स्थान की दर्शन करने के बाद वहां बैठकर एकांत में नाम जाप करें जिससे आपको बहुत ही आनंद प्राप्त होगी

तटीय स्थान की सम्पूर्ण जानकारी के लिए ये पढ़े क्लिक करे

जब आप इमली तला आए तब आप यहां पर  परिक्रमा जरूर लगाए एवं परिक्रमा लगाने के बाद यहां की रज अपने माथे पर जरूर लगाए यह मंदिर गोर्य संप्रदाय के द्वारा संचालित की जा रही है जिसकी स्थापना आज से 500 वर्ष पूर्व चेतन महाप्रभु ने किया था इतिहासकारों का कहना है कि जब चैतन्य महाप्रभु यहां पर बैठकर ठाकुर जी की ध्यान में लीन रहते थे अब उनके भाव में विहार होते थे तब कभी-कभी यह देखने को मिलता था कि

महाप्रभु जी का गोर्य रंग कभी-कभी ठाकुर जी की रंग में सामला हो जाता था

श्री चैतन्य महाप्रभु जी ने आज से 500 वर्ष पहले जब वृंदावन आए तब उस समय लुप्त हो रहे वृंदावन का जिन और धार किया वृंदावन की संस्कृति एवं धरोहर को संजोना में मुख्य योगदान  श्री चैतन्य महाप्रभु जी का ही है।।

इमली तला

 

: चैतन्य महाप्रभु मूल रूप से बंगाल के निवासी थे चैतन्य महाप्रभु को कहा जाता है कि वह राधा रानी का ही एक अवतार थे जब चैतन्य महाप्रभु अपनी लीला इस धरा धाम पर समाप्त कर रहे थे तो वह जगन्नाथ मंदिर में जगन्नाथ जी की स्वरूप के सामने खड़े होकर स्वस्थ शरीर जगन्नाथ जी की स्वरूप में समाहित हो गए तो शरीर सहित  वह निकुंज गमन हो गए

जरुरी बातें – इमलीतला मंदिर पहुँचने का मैप 

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