प्रिय दोस्तों लिए आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से श्रीधाम वृंदावन की परिक्रमा मार्ग पर डिजिटल अवं मानसिक रूप से ले जाएंगे एवं परिक्रमा मार्ग पर आने वाली एक-एक करके सभी दर्शनीय स्थान के बारे में बताएंगे

तो चलिए आज शुरू करते हैं यदि हम परिक्रमा श्री हित राधा केली कुंज के पास से शुरू कर रहे हैं तो लिए इससे आगे की दर्शन आपको डिजिटल रूप से करवाते चलेंगे सर्वप्रथम जब हम केलि कुँज से परिक्रमा मार्ग पर परिक्रमा लगाना शुरू करते हैं तो हमें परिकर्मा उठाने से पहले तीन बार दंडवत प्रणाम पहले करना चाहिए उसके बाद अपना परिक्रमा राधा नाम जाप करते हुए शुरू करने चाहिए चलिए अब हम केलि कुँज से परिक्रमा शुरू करके थोड़ी सी आगे बढ़ते हैं तो
वहां पर हमें बाएं हाथ पर एक अति प्राचीन विशाल पेड़ देखने को मिलेगा आप उस पेड़ के पीछे से परिक्रमा लगाते हुए परिक्रमा मार्ग पे आगे बढ़े एवं वहां से आगे बढ़ने पर जब आप दाएं तरफ परिक्रमा मार्ग पर मुड़ते हैं तो महज वहां से 100 मीटर की दूरी पर आपको मदन टेड दिखाई देगी
आप मदन टेड की दर्शन अंदर जाकर या फिर बाहर से मानसिक प्रणाम जरूर करें मदन टेड कोई साधारण स्थान नहीं है

मदन टेड जहां पर बैठकर श्री हरिवंश महाप्रभु कठोर तप किया करते थे उनकी तपस्थली है एवं मदन टेर में ही श्री प्रेमानंद जी महाराज जब वृंदावन आए तो बहुत दिन तक वहां पर ही रुके थे एवं भजन कीर्तन करते थे मदन टेर के दर्शन के बाद परिक्रमा मार्ग पर जब आगे बढ़ेंगे तो वहां से लगभग 500 मीटर बाद कालिदाह मंदिर आएगी मदन टेड और कालिदास के बीच में आपको और भी कई चीज देखने को मिलेगी
जैसे कि इस्कॉन का गौशाला, श्री जी का बगीचा एवं और कई आश्रम भी है जब आप कालीदह पहुंचते हैं तो कालिदाह वह जगह है जहां पर ठाकुर जी ने श्री कालिया नाग का वध किया था तो आप कालिदाह को दर्शन करें या फिर मानसिक प्रणाम करते हुए वहां से आगे बढ़े वहां से लगभग 300 मीटर की दूरी के बाद आपको दाएं हाथ पर मदन मोहन मंदिर की टीला दिखेगी
प्रेमानंद जी महराज को सबसे पहले राधा रानी की दर्शन यहीं पर हुई थी

मदन मोहन मंदिर अति प्राचीन मंदिरों में से एक है जब हमारे पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज वृंदावन से कोई भी सुविधा या रहने की व्यवस्था न होने की वजह से वापस बनारस जाने का दुखी भाव से नीचे उतर रहे थे तब पहली बार श्री राधा रानी ने इस मदन मोहन की टीला पर छोटी बच्ची के रूप में आकर महाराज जी की चुनरी पड़कर और उनसे बोलने लगे थे की जावेगो बाबा जावेगो तब जाकर बाद में महराज जी को एहसास हुआ था कि वह साक्षात राधा रानी थी
: जब आप मदन मोहन से थोड़ा सा और आगे बढ़ेंगे तो थोड़ी दूर बाद आपको बिहारी जी मंदिर की रास्ता दिखाई देंगे एवं वहीं से ठीक बाय मुड़ने पर आप जुगाल घाट यमुना जी पर जा सकते हैं एवं यमुना जी का आप यहां पर भी दर्शन कर सकते हैं या थोड़ी दूर और आगे जाकर भी . जब आप यहां से आगे बढ़ेंगे तो मात्र 50 मीटर के बाद राधा वल्लभ मंदिर जाने के लिए एक गली दिखाई देगी वहां से आप राधावल्लभ जो को मानसिक प्रणाम करें एवं
जब आप नाम जाप करते हुए वहां से 400 मीटर और आगे जाए तो आपको दाएं हाथ पर श्री ठाकुर जी की समय की और द्वितीय अद्भुत उस जमाने के लगभग 5500 साल पुराना इमली का पेड़ दिखाई देगा जो जगह इमली तला के नाम से जाना जाता है जिसके बारे में कहा जाता है कि
यही इमली तला के इमली से ठाकुर जी ने राधा रानी को अलता भी लगाया था

तो संभव हो तो आप 1 मिनट के लिए वहां अंदर जाकर पेड की दर्शन जरूर करें जब आप इमली तला से और आगे की तरफ बढ़ेंगे तो कुछ दूर आगे जाने के बाद आपको चिर घाट दिखाई देगा कहां जाता है कि वहां पर जो कदम का पेड़ है वह भी इस समय के लगभग 6000 साल पुराना है एवं ठाकुर जी ने यहीं पर गोपियों का चीर हरण किए थे एवं वहीं पर से आपको राधा रमण एवं निधिवन एवं राधा दामोदर मंदिर जाने का रास्ता मिलेगा
यहां से आप दो रास्ते से परिक्रमा लगा सकते हैं या तो आप सीधे केसी घाट की तरफ आगे बढ़ सकते हैं या फिर आप यहां से अंदर की तरफ जाकर सेवाकुंज राधा दामोदर मंदिर निधिवन एवं राधा रमन जी की दर्शन करते हुए राधा रमन जी की बगल वाली गली से केसी घाट के आगे निकल सकते हैं
: या फिर आप चिर घाट से सीधे केसी घाट के लिए भी निकल सकते हैं केसी घाट के पास पहुंचने पर आप यमुना जी का आचमन करें जमुना जी की दर्शन करें एवं चलिए यहां से आगे की ओर बढ़ते हैं जब हम केसी घाट से आगे की तरफ बढ़ेंगे तो आगे हमको सुदामा कुटी मिलेगी आज भी वृंदावन के कई सिद्ध संत सुदामा कुटी में रहते हैं जब कभी आपके पास टाइम हो तो आप अलग से एक दिन सुदामा कुटी जाकर दर्शन करें वहां पर मलूक पीठ की दर्शन करें
सुदामा कुटी से जब हम थोड़ी दूर और आगे चलेंगे तब हमें बाएं हाथ पर मोक्ष धाम दिखाई देगा मानसिक रूप से मोक्ष धाम को भी नमन करते हुए जैसे आगे बढ़ेंगे वैसे ही दाहिने हाथ पे टटिया स्थान दिखाई देगा

टटिया स्थान जहां आज भी कलयुग प्रवेश नहीं किया है जहां आज भी रात में दिया ही जलता है कोई बिजली या कोई जनरेटर वहां नहीं चलता है टटिया स्थान में यदि कभी दर्शन का समय हो तो आप अंदर दर्शन करें और आगे बढ़े
टटिया स्थान से आगे बढ़ने के बाद पानी गांव तिराहा आता है जहां से लोग बाहर के लिए भी हाईवे पर जाने के लिए मुड़ते है उस तिराहा के पास से आगे बढ़ेंगे तो आपको चामुंडा देवी की मंदिर के दर्शन होगी और भगवत मंदिर के दर्शन होगी एवं यहां से जब थोड़ी और आगे बढ़ेंगे तब आपको जगन्नाथ जी की मंदिर के दर्शन होती है दर्शन करते हुए जब हम परिक्रमा मार्ग पर और आगे जाएंगे ,
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रास्ते में श्री नीम करोली बाबा का आश्रम दिखाई देगा
जहां पर श्री नीम करोली बाबा का समाधि स्थल है आप वहां पर समाधि की दर्शन जरूर करें नीम करोली बाबा से जब हम निकल कर आगे बढ़ते हैं तब कुछ ही दूर बाद अटला चुंगी चौराहा आता है जो की वृंदावन के प्रसिद्ध मार्केट के चौराहा में से एक है

अटला चुंगी से जब हम और आगे परिक्रमा मार्ग को बढ़ेंगे तो हमें दाहिने हाथ पर मिथिला कुंज के दर्शन होगी जहां पर शिला में भागवत के श्लोक अंकित है यहां से थोड़ी दूर ही और आगे जाने पर बाएं हाथ पर सोहम आश्रम की दर्शन होगी जोकि अति प्राचीन है ऐसे ही सोम आश्रम से आगे बढ़ने पर रास्ते में अनिरुद्ध आचार्य जी महाराज का वृद्धाश्रम एवं भंडारा स्थल गौरी गोपाल आश्रम आएगी
गौरी गोपाल आश्रम से थोड़ी दूर ही और आगे बढ़ने पर ललिता आश्रम एवं ललिता आश्रम से 100 मीटर की दूरी के बाद हमारा रमन रेती चौराहा आता है जहां से दाएं तरफ पर इस्कॉन मंदिर है और बाएं तरफ पर प्रेम मंदिर है इस चौराहा से जब हम आगे बढ़ते हैं तो कुछ ही दूर बाद राधा टीला दिखाई देगा और राधा टीला से मात्र 100 मीटर की दूरी के बाद पुनः हम अपने प्रारंभ स्थल श्री हित राधा केलि कुंज पर पहुंच जाएंगे आप इस मानसिक परिक्रमा करने के बाद मन ही मन वृंदावन को प्रणाम करें एवं कुछ मंत्र जाप जरूर करें राधा वल्लभ श्री हरिवंश
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