वृंदावन की राधा दामोदर मंदिर जिसकी परिक्रमा लगाने से गोवर्धन की परिक्रमा का माना जाता है best update 2026

 

वृंदावन की राधा दामोदर मंदिर में स्थित वो शिला जिसपे ठाकुर जी की चरण चिन्ह उभरी हुई है

ऐसी जगह जिसकी परिक्रमा लगाने से गोवर्धन की परिक्रमा का माना जाता है मेरे प्रिय पाठक आई आज हम आपको वृंदावन धाम की एक ऐसी पवित्र स्थान के बारे में बताएंगे जिसकी दर्शन करने के बाद उनकी चार परिक्रमा लगाने से श्री गोवर्धन की परिक्रमा लगाने का पुण्य मिलता है

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श्री वृंदावन धाम में स्थित अति प्राचीन मंदिरों में से एक श्री राधा दामोदर मंदिर जिनकी परिक्रमा लगाने से जिनकी चार बार परिक्रमा पूर्ण करने से गोवर्धन गिरिराज जी की परिक्रमा का फल मिलता है और यह स्वयं श्री ठाकुर जी का कहा हुआ वचन है

जब श्री महाप्रभु जी नित्य रोज गिरिराज जी  की परिक्रमा लगाया करते थे एवं उनकी पूरी जीवन परिक्रमा लगाने के बाद जब श्री महाराज जी बहुत ज्यादा बूढ़े हो गए एवं चलने में और समर्थ हो रहे थे तब भी श्री महाराज जी गिरिराज जी की परिक्रमा किसी भी हाल में करना नहीं भूलते थे एक दिन ऐसा हुआ कि जब श्री महाराज जी गोवर्धन पहुंचे एवं गिरिराज जी की परिक्रमा लगना शुरू किया

तब श्री महाराज की परिक्रमा लगाते समय बीच रास्ते में शारीरिक रूप से कमजोर हो जाने की वजह से वह परिक्रमा लगाते लगाते गिर गए जब महाराज श्री को परिक्रमा मार्ग में गिरते हुए ठाकुर जी ने देखा तब ठाकुर जी स्वयं प्रकट हुए एवं महाराज जी से आग्रह करते हुए अब दोबारा गोवर्धन में गिरिराज जी  की परिक्रमा करने की जरूरत नहीं है बताने लगे लेकिन श्री महाराज जी ठाकुर जी की भाव में वह मानने को तैयार नहीं थे

 श्री ठाकुर जी ने अपनी चरण चिन्ह अंकित गिरिराज जी की शीला श्री महाराज जी को दिए

और  तभी ठाकुर जी ने महाराज श्री से कहा कि अब आपको गिरिराज जी आने की कोई जरूरत नहीं है अब आप इस शीला को चार बार परिक्रमा लगा ले जिससे आपके पूरे गोवर्धन की परिक्रमा का फल मिल जाएगा वह शीला लेने के बाद जब महा  प्रभु वापस वृंदावन आए तब वह शीला राधा दामोदर मंदिर में स्थापित किये

राधा दामोदर मंदिर

जो कि आज भी जब हम राधा दामोदर मंदिर में दर्शन करने जाते हैं तो सबसे आगे वह शीला की दर्शन होती है जिस पर ठाकुर जी की चरण चिन्ह एकदम प्योर साफ-साफ उबरी हुई है जिनकी दर्शन का सौभाग्य आपको मिलेगा इसलिए जब भी आप श्रीधाम वृंदावन में ठाकुर जी के समय के दर्शन की भावना लेकर आए तब आप राधा दामोदर मंदिर जरूर जाएं एवं राधा दामोदर मंदिर में सामने स्वरूप की दर्शन करने के बाद

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जब  आप इस अद्वितीय इस महान शीला जो स्वयं  श्री कृष्ण के द्वारा दिया गया हो एवं जिस पर श्री कृष्ण की चरण चिन्ह अंकित है उस चरण चिन्ह की दर्शन जरूर करें एवं उसके बाद आप महामंत्र का नाम जाप करते हुए चार बार राधा दामोदर मंदिर की परिक्रमा करें राधा दामोदर मंदिर की परिक्रमा करते समय आपके बीच में श्री महा प्रभु जी की समाधि भी मिलेगी

राधा दामोदर मंदिर

यहाँ  रुक कर आप दर्शन करें एवं जब चार बार आप परिक्रमा पूर्ण कर लेते हैं तब आप राधा दामोदर मंदिर में थोड़ी देर बैठ कर नाम कीर्तन में जरूर बैठे

राधा दामोदर मंदिर दर्शन करने के लिए पहुंचने का सबसे सुलभ और सही रास्ता और तरीका आज हम आपको बताते हैं

राधा दामोदर मंदिर में यदि आप दर्शन के लिए आ रहे हैं तो इसके लिए आपको बांके बिहारी जी मंदिर की गेट नंबर 1 से परिक्रमा मार्ग पर गोविंद घाट के लिए कई यातायात की सुविधा मिल जाएगी गोविंद घाट पहुंचने के बाद आप निधिवन जाने वाले रास्ते में जैसे ही आगे बढ़ेंगे थोड़ी ही दूर बाद  दाहिने हाथ पर जो पहले गली जाती है उसमें आप आगे जाए वहां से लगभग 200 मीटर और आगे जाने के बाद आपको दाहिने हाथ पर राधा दामोदर मंदिर की दर्शन होगी

कार्तिक मास में राधा दामोदर मंदिर में दीपदान की अलग महत्व है

: राधा दामोदर मंदिर में अभी चल रहे हैं कार्तिक मास में दीपदान का एक अलग स्थान है वैसे आपको एक जानकारी के लिए बात बता दे  की कार्तिक मास को दामोदर मास भी कहा जाता है ब्रज की भाषा में। यहां पर कार्तिक मास में शाम के समय में दीपदान पूरे ब्रज में वैसे भी होती है लेकिन यमुना जी के साथ-साथ वृंदावन की दो मंदिरों में विशेष रूप से दीपदान का उत्सव होता है

जिसमे  की श्री राधा दामोदर मंदिर में शाम के समय में दीपदान के लिए बहुत भीड़ लगती है लोक दीप जलाकर ठाकुर जी की चरण चिन्ह अंकित हुई जो शीला है उनकी आरती करते हैं इसके बाद स्वरूप की आरती करने के बाद दीप को वहीं पर बनी हुई टीला  पर रख देते हैं इसके साथ ही वृंदावन की दूसरी मंदिर श्री राधाबल्लभ मंदिर में भी कार्तिक मास यानी कि दामोदर मास में दीपदान का विशेष उत्सव मनाया जाता है

राधा दामोदर मंदिर से सटी हुई सेवाकुंज की दर्शन जरूर करें

: राधा दामोदर मंदिर से निकलने के बाद वहां से मात्र 50 मीटर की दूरी पर सेवाकुंज स्थित है सेवाकुंज भी आपको लगभग निधिवन के जैसा ही है सेवाकुंज में भी आपको ठाकुर जी की गोपियों के प्यास लगने से ठाकुर जी के बंसी पटकने से कुंड प्रकट हुए थे जिससे गोपियों ने जल ग्रहण किया था उसकी दर्शन होगी सेवाकुंज श्री हरिवंश महाप्रभु के खास तप स्थलियो  में से एक है

निधिवन एवं सेवाकुंज  दोनों किस-किस संप्रदाय से जुड़े हैं

जैसे कि आपको बता दे की निधिवन मंदिर श्री हरिदास महाप्रभु की समाधि स्थल भी है निधिवन श्री हरिदास संप्रदाय के अंदर आती है जबकि वहीं सेवाकुंज श्री हरिवंश महाप्रभु की तपस्थली है एवं सेवाकुंज की जिम्मेदारी श्री राधावल्लभ संप्रदाय की है

राधा बल्लभ संप्रदाय की विशेष अनुयायी में श्री प्रेमानंद जी महराज भी है

जी हाँ पूज्य श्री प्रेमानंद जी महराज भी राधा बल्लभ संप्रदाय से ही आते है । महराज श्री को इस संप्रदाय से दीक्षा श्री गौरांगी शरण जी महराज ने दी थी . जोकि राधा रानी के खाश निज सेवकों में से एक है । इनकी दर्शन करने से आप तर जाओगे मतलब की आज के समय में इनकी दर्शन करने से ही आपको साक्षात् श्री ठाकुर जी अवं राधा रानी का दर्शन होती है

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1.  निधिवन  मंदिर जहाँ आज भी रत को ठाकुर जी गोपियों के साथ रास करते है 

2.इमली तला वृन्दावन श्री कृष्ण के समय के इमली के पैर आज भी मौजूद है 

3 . वृन्दावन  की परिकर्मा कितने किलोमीटर की है 

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