टटिया स्थान वृन्दावन जहां आज भी कलयुग का प्रवेश नहीं हो पाया है जहां आज भी रात को दिया जलता है best जानकारी 2026

टटिया स्थान वृन्दावन   जहाँ के प्रसाद पाने को देवता भी तरसते है जहाँ  आज भी रात को दिया जलता है जहां आज  कलयुग भी  प्रवेश करने से घबराता है  आज हम आपको टटिया स्थान वृन्दावन के बारे में रहस्यमई एवं रोचक बातें बताएंगे

टटिया स्थान वृन्दावन जो की वृंदावन के सबसे प्रमुख स्थलों में से एक है  पहुंचने का तरीका

टटिया स्थान वृन्दावन

यही नहीं तटीय स्थान वृंदावन की मूल एवं प्राचीन धरोहर में से एक है तटीय स्थान वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर स्थित है टटिया स्थान जाने के लिए आप गोपेश्वर महादेव मंदिर से भी जा सकते हैं एवं जब आप परिक्रमा लगा रहे होते हैं तब कैसी घाट से कुछ दूर आगे बढ़ाने के बाद आपको बाएं हाथ पर वृंदावन की मोक्ष धाम देखने को मिलेगा एवं मोक्ष धाम से थोड़ी दूर आगे बढ़ाने के बाद देवरा बाबा की तरफ जाने वाले रास्ते दिखेंगे वही उसकी दूसरी तरफ नई तरफ आपको तटीय स्थान मिल जाएगी

 

: टटिया स्थान वृन्दावन  में आज तक कलयुग का प्रवेश नहीं हो पाया है और ऐसा माना जाता है कि आगे भी इसमें कलयुग का प्रभाव नहीं होगा वृंदावन की ऐसी जगह जहां कलयुग भी प्रवेश करने से घबराता है तटीय स्थान में आज के जमाने में भी अभी तक कोई भी प्रकार की बिजली की व्यवस्था देखने को नहीं मिलेगी

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इतनी गर्मी में भी वहां पर कोई भी प्रकार की कूलर पंखा ऐसी आपको देखने को नहीं मिलेगा भीषण से भीषण गर्मी में भी आपको वहां के महंत एवं सेवक वहां के रज  पर मात्र  एक पतली सी आसान बिछाकर सोते  हैं तटीय स्थान में किसी भी प्रकार की कोई भी आधुनिक यंत्र यानी की डिजिटल घड़ी मोबाइल फोन लैपटॉप कंप्यूटर या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाना माना है

यदि आप तटीय स्थान दर्शन करने जा रहे हैं तो आपसे तटीय स्थान के गेट पर ही विशेष आग्रह करके आपके मोबाइल फोन स्विच ऑफ करवा दिए जाते हैं एवं तटीय स्थान में ठाकुर जी की दर्शन करते हैं आप तत्पश्चात आप महाप्रभु जी की भी दर्शन कर सकते हैं

टटिया स्थान वृन्दावन  हरिदास संप्रदाय से जुड़ी हुई है

 

: तटीय स्थान श्री स्वामी हरिदास जी की कठोर तपस्थली है आपकी जानकारी के लिए बता दो की बांके बिहारी जी मंदिर श्री हरिदास संप्रदाय की मंदिर है कहा जाता है कि श्री हरिदास महाप्रभु निधिवन में बैठकर जब कठोर तपस्या किया तब उनकी भजन के ताप से ठाकुर जी की विग्रह प्रकट हुई एवं वही ठाकुर जी का नाम बांके बिहारी जी कोई काफी दिन के बाद गोस्वामी जी के विशेष आग्रह  पर बांके बिहारी जी को वृंदावन में स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में स्थापित किया गया इसलिए बांके बिहारी मंदिर भी श्री हरिदास संप्रदाय में ही आतेहैं

कहा जाता है कि टटिया स्थान में मिलने वाले प्रसाद  में वह स्वाद होता है जिसके लिए देवता भी तरसते हैं

: जी हां जब टटिया स्थान में दिन में ठाकुर जी की भोग लगे के बाद भंडारा होती है तो उसे प्रसाद का स्वाद इतना ज्यादा स्वादिष्ट होता है जिसे पाने के लिए माना गया है कि देवता मुनि भी तरसते रहते हैं जब आप वृंदावन आए तो दिन के 1:00 बजे टटिया स्थान में होने वाली भंडारे में जरूर शामिल हुए पर भंडारा पाने के बाद आप हर संभव प्रयास करें कि आप वहां दान पेटी में कुछ ना कुछ अपना सहयोग राशि जरूर अर्पित करें

: शाम के टाइम में दिवाली जैसी सजाती है टटिया स्थान वृन्दावन

: आज के इस भाग दौड़ के डिजिटल जमाने में जब आपको कुछ प्राचीन दृश्य देखने का मन हो तो आप शाम के टाइम में टटिया स्थान वृन्दावन जरूर देखने जाए जहां पर आपको चारों तरफ सिर्फ दिए ही दिए जलते हुए दिखाई देंगे क्योंकि यहां पर कोई बिजली की प्रवेश नहीं होने की वजह से कोई भी इलेक्ट्रॉनिक लाइट नहीं लगी होती है

एवं रात्रि के हल्के हल्के अंधेरे में हर तरफ दिए की रोशनी से आपको जगमग तटीय स्थान में घूमते हुए अनुभव होगा कि आप बचपन में जो कहानी सुनते थे कि पहले के जमाने में लोग रात्रि में कैसे दिए जलाकर रहते थे वैसा ही अनुमति आपको देखने को मिलेगा सायं कल  में इस अद्भुत नजारा को देखने के बाद आपको वहां पर बहुत ही सुंदर प्रसाद पाने का अवसर मिलेगा

टटिया स्थान वृन्दावन के महाराज जी का दर्शन कैसे करें

: तटीय स्थान में जब आप दर्शन में जाते हैं तो यदि आप स्त्री शरीर है तो वहां पर आपको अपने सर को ढकना आवश्यक होता है एवं यदि आप पुरुष शरीर है तो आपको हाफ पेंट में एंट्री नहीं मिलेगी जब आप अंदर दर्शन के लिए जाते हैं तब ठाकुर जी की दर्शन करने के बाद आप वहां पर महाराज जी की भी दर्शन करने का सौभाग्य पा सकते हैं

टटिया स्थान वृन्दावन

महराज जी आज के समय की कोई गद्दे या फिर किसी सोफे पर नहीं बैठते हैं जबकि महाराज जी वहां पर मात्र तटीय स्थान की रज् से बनी हुई ऊंची आसन पर ऐसे ही बैठते हैं उनके दर्शन करते समय आप उन्हें किसी भी प्रकार से जोर से बोलकर संबोधित ना करें आप उन्हें मन ही मन दंडवत करते हुए प्रणाम करें वहां से बाहर निकालने के बाद आपको गेट पर चरना  अमृत मिलेगा चरना  अमृत लेना ना भूले

: तटीय स्थान में आप दर्शन करने के बाद अंदर प्रांगण में पेड़ के पास नीचे बैठकर अपना ध्यान करें मंत्र जाप करें वहां आपको शांत वातावरण होने की वजह से बहुत ही अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है

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टटिया स्थान वृन्दावन खुलने का समय एवं बंद होने का समय

: टटिया स्थान वृन्दावन में दर्शन करने का समय बहुत कम समय के लिए होता है तटीय स्थान में दर्शन का समय सुबह 10:30 से शुरू होती है एवं 12:30 पर दर्शन की समय बंद हो जाती है इसके बाद आपको पुणे दर्शन का समय शाम के 5:00 बजे शुरू होती है एवं पुनः रात की संयं आरती  के बाद रात्रि में 8:00 बजे से दर्शन पुण बंद हो जाती है

टटिया स्थान वृन्दावन के अंदर रहने वाले महंत एवं अंदर सेवादार आज के समय में भी वह किसी भी प्रकार की टेलीफोन मोबाइल एवं टीवी का प्रयोग नहीं करते हैं।।

: यहां के महंतों एवं सभी सेवादारों की वस्त्र अलग प्रकार की होती है नीचे सफेद अचला एवं ऊपर सफेद कुर्ता जिस पर ऊपर से आदि काली रंग की छोटी-छोटी डिजाइन बनी रहती है एवं एक काली गमछा जिस पर की कुंज बिहारी श्री हरिदास लिखी हुई रहती है

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