राधा वल्लभ श्री हरिवंश यदि आप महाराज श्री के आश्रम केली कुंज आना चाहते हैं तो आपको हम आज आपको केली कुंज पहुंचने के रास्ते एवं केली कुंज से जुड़ी सभी जानकारी इस पोस्ट के माध्यम से दे रहे हैं केली कुंज कैसे पहुंचे एवं
केली कुंज के पास कहां रुके केली कुंज के पास खाने एवं घूमने की जगह क्या क्या है
: यदि आप केली कुंज ट्रेन से आ रहे हैं तो आप मथुरा उतरकर वहां से प्रेम मंदिर के पास या फिर अटला चुंगी के पास आ जाए एवं वहां से आप पैदल भी आ सकते हैं या फिर किसी ई रिक्शा से पहुंच सकते हैं केली कुंज वृंदावन के रमन रेती पुलिस चौकी के पास ही है परिक्रमा मार्ग पर स्थित है वाराह घाट के पास
केली कुंज के पास आपको रुकने के लिए सस्ते से सस्ते एवं अच्छे से अच्छे सभी प्रकार की होटल मिल जाएगी यदि आप महंगी एवं प्रीमियम होटल के लिए केली कुंज के पास ढूंढ रहे हैं तो आप आनंद कैसल आपके लिए सबसे उत्तम रहेगा एवं राधा टीला पर स्थित प्रसिद्ध आश्रम निम्बार्क सेवा सदन में भी आप रुक सकते हैं
केलि कुंज के पास सस्ती होटल यहाँ मिलेगा आपको
यदि आप थोड़ी सी सस्ते प्राइस में होटल ढूंढ रहे हैं तो आप केली कुंज से कालिदास की तरफ जाने वाले रास्ते में कई ऐसे होटल है जो की परिक्रमा मार्ग से पंकज स्कूल के पास से या फिर बीच में कई अंदर की तरफ रास्ते जाते हैं जिसमें आप जितना अंदर जाएंगे उतना ही आपको सस्ता होटल मिल जाएगा
केली कुंज के पास से सौभरि वन जाने वाले रास्ते में आपको बहुत सस्ता होटल मिलेगा जहां से आपको एक एक्स्ट्रा बेनिफिट या मिलेगा कि महाराज श्री के गुरुदेव यानि की हमारे दादा गुरुदेव का आश्रम भी वही पर स्थित है एवं वहां से केली कुंज भी आपको बहुत पास पड़ेगा यदि आप केली कुंज के पास बजट फ्रेंडली ढूंढ रहे हैं तो आप इसी रास्ते में अपना होटल बुक कर सकते है
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केली कुंज के पास रुकने के कई और फायदे हैं जहां पर आपको रात्रि में भी दिन जैसा माहौल देखने को मिलेगा
केली कुंज के पास रुकने से आपको यह एक विशेष फायदा है कि आप यहां पर रात्रि में 1:00 बजे 12:00 बजे 2:00 बजे भी यदि घूमने का सोच रहे हैं तो यहां पर आपको पूरी रात दुकान और ज्यादा सजी हुई मिलेगी जहां आपको काफी हलचल देखने को मिलेगा मूल रूप से यहां आपको रात्रि में खाने के लिए बहुत सारे अलग-अलग प्रकार की विशेष चीज देखने को मिलेगी
जो की पूरी रात्रि खुली रहती है यहां पर रात्रि में आपको और भी कई सारी दुकान जैसे की कंठी माला की दुकान पूजा पाठ से जुड़ी सामग्री की दुकान की पूरी रात खुली मिलेगी यदि आप रात्रि में चाय एवं नाश्ता ढूंढ रहे हैं तो आपको कई ऐसे अच्छे चाय की दुकान केली कुंज के सामने मिल जाएगी जहां आप चाय एवं कॉफी रात्रि में अपने परिवार एवं दोस्तों के साथ बैठकर पी सकते हैं
: केली कुंज के पास शाम में आपको केली कुंज से परिक्रमा मार्ग की तरफ बढ़ने पर लाडली निकुंज गेट से थोड़ी सी और आगे जाने पर आपको दाएं हाथ में मदन टेड देखने को मिलेगा आप शाम में मदन टेड की दर्शन जरूर करें मदन टेड कोई साधारण जगह नहीं है यह साक्षात् श्री हरिवंश महाप्रभु की तपस्थली है
मदन टेड जहाँ हरिवंश महाप्रभु बैठ कर भजन किया करते थे

आपकी जानकारी के लिए बता दो कि जब महाराज श्री वृंदावन आए थे तो महाराज श्री भी कई दिन तक मदर टेड में ही रहे थे जहां वह रात्रि में ऐसे ही जमीन पर नाम जाप करते-करते सो जाते थे मदन टेड के बाहर रोड के दूसरी तरफ आपको अद्भुत ही कीर्तन देखने को मिलेगा कई भक्त वहां पेड़ के नीचे बैठकर राधा नाम की कीर्तन करते रहते हैं जबकि वहीं पर कई भक्त नाम रूपी कीर्तन में की रस में डूब कर नृत्य करते हुए देखने को मिलेंगे
आप उस कीर्तन में कुछ समय निकाल कर जरूर बैठे आपको एक अलग प्रकार की अनुभूति होगी मदन टेड केली कुंज से मात्र 200 मीटर की दूरी पर है मदन टेड की दर्शन की समय शाम में 4:00 बजे से 8:00 तक होती है इसलिए सायं कल में अब मदन टेड की दर्शन जरूर करें
सौभरि कुंड जहां पहले महाराज जी दर्शन दिया करते थे

केली कुंज से मात्र 400 मीटर की दूरी पर सोवारि कुंड स्थित है सौभरि कुंड सौभरि ऋषि की तपस्थली है सौभरि कुंड महाराज श्री के गुरुदेव के आश्रम के आगे से ही होकर है जाती है सौभरि कुंड पर रात्रि में कई ऐसे यात्री जो होटल में नहीं रुकना चाहते हैं वह आपको वह रात्रि में कुछ बिछाकर विश्राम करते हैं
दादा गुरुदेव भी प्रातः कल में अपने आश्रम से निकल कर सौभरि वन सुबह 5:30 पर जाते हैं एवं पुनः सौभरि वन से 7:00 बजे वापस आते हैं इसलिए कई बार दादा गुरुदेव की दर्शन रास्ते में हो जाती है यहां पर रहने वाले उनके सभी शिष्य गण प्राय उनके दर्शन के लिए सुबह-सुबह सौभरि कुंड से राधा वाटिका के बीच के रास्ते में उनके आने के समय में दर्शन के लिए खड़े रहते हैं जहां से आपको दादा गुरुदेव की अद्भुत दर्शन का सौभाग्य मिलेगा
: महाराज जी अब केलि कुंज में नहीं बेलवन में रहते हैं
पूज्य महाराज जी अब अपना आश्रम केलि कुंज में नहीं रहते हैं अब महाराज जी यमुना जी के उस पर बलवन नामक गांव में यमुना जी के किनारे अपना नए आश्रम यमुना विहार कुंज में रहते हैं लेकिन महाराज जी महीने में दो से तीन बार किसी किसी दिन वृंदावन आते हैं केली कुंज में श्री जी की दर्शन करके कुछ सत्संग करने के बाद फिर दादा गुरुदेव की दर्शन के लिए राधा वाटिका जाते हैं
एवं राधा वाटिका में बड़े महाराज जी की दर्शन करने के बाद वह पुण यमुना विहार कुंज लौट जाते हैं लेकिन अभी भी महाराज जी की दर्शन दीक्षा से संबंधित सभी प्रकार की गतिविधियां केलि कुञ्ज आश्रम से ही होती है यानी की एकांतिक दर्शन की टोकन या फिर दीक्षा की उपस्थिति सभी केली कुंज में ही लगती है बाकी महाराज जी से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी केलि कुञ्ज आश्रम के बाहर बने इंक्वारी काउंटर पर से दी जाती है
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