मानसरोवर वृन्दावन में कहाँ स्थित है ? मानसरोवर कुंड कैसे बना ? new 2026 yes

प्रिय दोस्तों आज हम आपको वृंदावन में स्थित मानसरोवर कुंड के बारे में बताएंगे एवं उनसे जुड़ी क्या है इतिहास इसके बारे में आपको विस्तार से बताएंगे

मानसरोवर

मानसरोवर कुंड कैसे पहुंचे आइये हम आपको विस्तृत में बताते है

मानसरोवर कुंड जो की वृंदावन से 10 से 12 किलोमीटर दूर स्थित है मानसरोवर कुंड वृंदावन से मार्ट जाने वाले रास्ते पर मार्ट से लगभग 5 किलोमीटर पहले ही सड़क के दाहिने हाथ पैर पड़ती है
वृंदावन से मानसरोवर जाने के लिए आपको वृंदावन में मायावती हॉस्पिटल के आगे से मार्ट के लिए जाने वाली ऑटो पड़ती होगी या फिर आप चाहे तो पर्सनल ई रिक्शा बुक कर सकते हैं जिसका किराया 200 से ₹300 के आसपास होगा आप उससे भी मानसरोवर पहुंच सकते हैं मानसरोवर पहुंचकर आप सर्वप्रथम मानसरोवर कुंड में स्थान जरूर करें तत्पश्चात वहां राधा रानी की मंदिर में राधा रानी की दर्शन करें

आइये   मानसरोवर के इतिहास के बारे में आपको बहुत ही रोचक बात बताते हैं

जब वंशीवट पे महारास का आयोजन हुआ था तो रास का आनंद लेने के लिए महादेव गोपियों की भेष में स्त्री भेष धारण करके पहुंचे लेकिन जब ठाकुर जी ने महादेव को देखा तो वो पहचान गए एवं उनको गोपेश्वरी से सम्बोधित करते हुए अपने पास बैठाये अवं  महादेव के प्रति इतना विहार हो गए की राधा रानी तक को कुछ समय के लिए भूल गए

श्री कृष्ण को महादेव की प्रति इतने व्याकुल देखकर राधा रानी मां ही मन परेशान होने लगी कि ऐसा कौन सा गोपी आज महारास में आई है जिसको देखने के बाद ठाकुर जी राधा रानी को ही भूल गई एवं राधा रानी को इस बात से बहुत बेचैनी हुई एवं नाराजगी हुई की ठाकुर जी आज तक राधा रानी को गोपेश्वरी की उपाधि नहीं दी थी गोपेश्वरी मतलब की सभी गोपियों के ईश्वरी राधा रानी को बहुत आश्चर्य हो रहा था कि आखिर कौन गोपी आ गई है जिसको ठाकुर जी सीधे गोपेश्वरी बना दिए हैं इस बात से राधा रानी बहुत नाराज हो गई एवं रूठ कर महारास से बाहर जाने लगी

जब उनकी सखियां उनसे जाने का कारण पूछ रहे थे तो राधा रानी रोते हुए बोली पता नहीं कौन सी काली कलूटी थी गोपिया आ गई है क्या काला जादू ठाकुर जी पर कर दिया है जिससे कि ठाकुर जी राधा रानी को भी भूल कर उनके पीछे ही व्याकुल है धीरे-धीरे राधा रानी महाराज से बाहर निकलकर गुस्से में खाली पर ही जंगल की तरफ बढ़ गए जब महारास में से राधा रानी बाहर निकल गई तो फिर महारास में राशि ही ना रहा जब ठाकुर जी को यह पता चला कि राधा रानी रस में से निकाल कर चली गई है तब ठाकुर जी बहुत परेशान हुए एवं महारास बंद हो गए

ठाकुर जी की बंशी और मुकुट मानसरोवर में राधा रानी के पास ही रहा

अब ठाकुर जी राधा रानी को ढूंढने के लिए जंगल में व्याकुल होकर इधर-उधर देख रहे थे एवं राधे-राधे पुकार रहे थे तब ठाकुर जी ने जमीन पर पड़े राधा रानी के कोमल पद कॉन को दिखा तो ठाकुर जी उन पर चोन के पीछे-पीछे उनको ढूंढते ढूंढते और राधा राधा पुकारते आगे बढ़ते जा रहे थे

इधर राधा रानी जब चलते-चलते बहुत थक गई एवं नंगी पांव होने की वजह से उनके पैर में कई प्रकार के कांटे चुभ गए थे पर जख्म हो गया था तब वह थक कर वहां मानकर मतलब की रूठ कर बैठ गई इधर ठाकुर जी उनके पद कॉन के पीछे चलते-चलते जब वहां पहुंचे और राधा रानी को इस अवस्था में देखें

तब ठाकुर जी ने राधा रानी को मानने लगे की वापस चलिए पर राधा रानी मन में बैठी हुई थी जब ठाकुर जी ने राधा रानी को मनाने के लिए उनके पैर पड़े तो पैर पकड़ने के लिए ठाकुर जी अपना बंसी वही राधा रानी के पास रखें एवं दोनों हाथों से उनका पैर पड़े कि अब मान जाइए जब राधा रानी ने देखा कि ठाकुर जी उनका पैर पकड़ लिए है

 

तब राधा रानी उनसे नाराजगी भरे स्वर में बोली की ऐसी कौन सी गोपी थी जिसको आप गोपेश्वरी कह रहे थे तब श्री ठाकुर जी ने राधा रानी से कहा कि वह गोपी कोई और साधारण गोपी नहीं थी वह साक्षात महादेव थे तब राधा रानी को एहसास हुआ फिर वह मान गए जब ठाकुर जी ने राधा रानी से चलने को कहा तो राधा रानी ने कहा कि उनका पैर बुरी तरह से जख्म हो चुका है वह अब बिल्कुल भी चलने की हालत में नहीं है तब ठाकुर जी ने राधा रानी से आग्रह किया कि आप हमारे कंधे पर बैठ जाएं जब राधा रानी कंधे पर बैठने के लिए तैयार हुई

तब ठाकुर जी ने अपना मुकुट भी वही बंसी के पास उतार कर रखा एवं जैसे ही राधा रानी ठाकुर जी के कंधे पर विराजमान हुई फिर वह दो शरीर एक मां एक आत्मा थे तभी ठाकुर जी के पास ना हाथ में बंसी थी ना मुकुट थी ना ही वह नेटवर्क स्वरूप में विराजमान थे तभी ठाकुर जी अंतर ध्यान हो गए

ठाकुर जी का ब्रज की लीला समाप्त होने के बाद द्वारका में चक्र के साथ लीला शुरू हुई

एवं सीधे द्वारका में निकले जहां से उनके हाथों में चक्र है ठाकुर जी की बांसुरी तभी से वही राधा रानी के पास मानसरोवर में ही रह गया जब राधा रानी को एहसास हुआ कि ठाकुर जी अब अंतर ध्यान हो गए वह वहीं बैठकर ठाकुर जी की भावों में रोने लगी और राधा रानी की आंसू निकलते निकलते आंसुओं से वहां एक तालाब कुंड बना जिस की आज मानसरोवर कुंड के नाम से जाना जाता है इसलिए शास्त्र में मानसरोवर कुंड में स्नान करना बहुत ही सौभाग्य एवं बहुत बड़े फल प्राप्त करने की कही गई है साधु संतों का मानना है कि मानसरोवर में स्नान करने से सहचारी भाव की पुष्टि होती है

प्रेमानंद जी महाराज जी मानसरोवर जाने के लिए एवं मानसरोवर में स्नान करने के लिए अपने सभी शिष्यों को बोलते हैं

मानसरोवर वृंदावन की सबसे पवित्र स्थान में से एक है क्योंकि आपको पता है कि मानसरोवर कुंड की पानी साक्षात राधा रानी के आंसुओं से बनी है साक्ष श्री ठाकुर जी जब वृंदावन की अपनी लीलाओं को समाप्त कर किए थे तो वह उसे समय वही मानसरोवर कुंड के पास से ही अंतर ध्यान होकर द्वारका में चक्र लेकर निकले थे जहां से फिर उनका महाभारत की लीलाएं शुरू होती है एवं ठाकुर जी के अंतर ध्यान हो जाने के बाद राधा रानी ठाकुर जी की यादों में एवं भावनाओं में रोने लगी थी और वही रोने की आंसुओं से वह कुंड बना है

मानसरोवर का और भी बहुत ही रहस्यमय बातें जो आगे  हम आपको बताते हैं

: मानसरोवर कई सारे सिद्ध संतों का तपस्थली भी है जिसमें से की हमारे श्री हरिवंश महाप्रभु भी अपने भजन से वृंदावन में राधा वल्लभ जी को प्रकट किया एवं उसके बाद मानसरोवर में बहुत दिन तक साधना की थी श्री हरिवंश महाप्रभु के भजन के प्रताप से ही वहां पर राधा रानी की स्वरूप प्रकट हुई

जिनकी दर्शन आज मानसरोवर पर राधा  रानी मंदिर में होती है वह स्वरूप श्री हरिवंश मैन प्रभु के द्वारा ही प्रकट की गई है एवं श्री हरिवंश महाप्रभु अपनी लीलाओं की अंतिम समय में वहीं से शरीर निकुंज गए थे इसलिए सभी हरिवंशियों को एवं सभी सनातनियों को वृंदावन आने पर एक बार मानसरोवर जरूर जाना चाहिए एवं मानसरोवर कुंड में स्नान जरूर करना चाहिए

प्रेमानंद जी महराज जी भी मानसरोवर में स्नान करके सेवा करते है

मानसरोवर

हमारे गुरुदेव प्रेमानंद जी महाराज भी अपने सभी शिष्यों से मानसरोवर कुंड में जाकर स्नान करने की आज्ञा देते हैं एवं उनका कहना है कि मानसरोवर कुंड में स्नान करने से सहचारी भाव की पुष्टि होती है महाराज जी बताते हैं कि उनके गुरुदेव श्री गौरंगी शरण जी महाराज भी शुरू-शुरू में उन्हें मानसरोवर कुंड ले जाकर स्नान कराया करते थे

आप सभी कई सोशल मीडिया पर महाराज जी की एक वीडियो जरूर देखे होंगे जिसमें श्री महाराज श्री एक कुंड के किनारे सोहनी लग रहे हैं सोहनी मतलब की झाड़ू लगा रहे हैं वह स्थान ही मानसरोवर है इसलिए जब भी आप वृंदावन आए आप कृपया समय निकालकर एक बार मानसरोवर जरूर जाए एवं हर संभव प्रयास करें कि मानसरोवर कुंड में आप स्नान अवश्य करें यदि स्नान कर पाना वहां संभव न हो तो आप काम से कम वहां कुंड के जिलों से आचमन जरूर करें एवं राधा रानी की दर्शन जरूरकरें

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