हेलो दोस्तों आज हम आपको वृंदावन से जुड़ी हर छोटी-छोटी बातें एवं हर एक ध्यान रखने योग्य बातें बताएंगे वृंदावन पहुंचने पर आप किस प्रकार की कार्य करें और किस प्रकार की चीजों से आप सावधानी बरतें इसके बारे में हम आज आपको विस्तृत रूप से बताएंगे
वृंदावन पहुंचने के बाद सर्वप्रथम आपका कार्य होता है होटल ढूंढना यदिआप पहले से होटल बुक कर वृंदावन आ रहे हैं तब तो आप वृंदावन पहुंचने के बाद सीधे अपने होटल पहुंच जाएं यदि आप वृंदावन पहुंचने के बाद होटल ढूंढ रहे हैं तो आपको बहुत सारी बातों का ध्यान में रखना बहुत जरूरी है
वृंदावन पहुंचने पर होटल बुक करने से पहले ध्यान देने योग्य बाते
बहुत सारी सावधानियां रखना जरूरी है वृंदा मन में रुकने के लिए कई अच्छे होटल है जो बहुत आसानी से मिल जाती है एवं होटल के नाम पर कई तरह के स्कैन भी होते हैं आप वृंदावन पहुंचने के बाद सर्वप्रथम आप पहले यह डिसाइड करें कि आपको वृंदावन के किस मंदिर के पास या किस एरिया में आपको रहना सर्वोत्तम होगा जैसे कि कुछ प्रमुख जगह प्रेम मंदिर से सटे हुए जगह में आप रख सकते हैं
जो की चैतन्य विहार कहलाती है या फिर आप बिहारी जी मंदिर के आसपास के इलाकों में रूम लेकर रह सकते हैं एवं आप चाहे तो परिक्रमा मार्ग पर अकेली कुंज के आसपास कमरा ले या फिर अकेली कौन से लेकर कालिदास होते हुए पर बिहारी जी के मंदिर तक के बीच में कमरा ले सकते हैं
यदि आप ट्रेन से वृंदावन आ रहे हैं तो आपको कई सारे वहां पर लड़के मिलेंगे जो कि आपको मथुरा में ही रुक जाने का आग्रह करेंगे पर आप वहां से प्रयास करें कि वहां से ऑटो पड़कर 15 से 20 मिनट में वृंदावन पहुंच जाए ऑटो वाले आपको या तो प्रेम मंदिर पर पहुंच जाएंगे या फिर अटल या चुंगी पर पहुंच जाएंगे यदि आप अटला चुंगी पर उतर रहे हैं तो आप अटला चुंगी के आसपास भी कमरा ले सकते हैं वहां पर आपको अच्छे कमरे बहुत ही काम नाम में मिल सकता है
: यदि आपको थोड़ा प्राइम लोकेशन एवं बजट का इशू नहीं हो तो
आप बिहारी जी मंदिर के पास विद्यापीठ चौराहा के आसपास कई सारे होटल है जो थोड़ी अच्छी थोड़ी महंगी है लेकिन वहां का वातावरण बहुत ही अच्छी है वहां पर आप रूम ले सकते हैं यहां प्राइम लोकेशन पर होटल में कमरा खाली होने की संभावना बहुत कम होती है क्योंकि ज्यादातर अच्छे लोकेशन की होटल की कमरे ऑनलाइन पहले से बुक हो चुकी होती है यदि आप महाराज जी के आश्रम से जुड़ी चीज ध्यान में रख रहे हैं तो आपकेली कुंज के आसपास पहुंच जाएं यहां आपको 800 से हजार रुपए में एक कमरा मिल जाएगा
होटल बुक करते समय कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखें जिससे आप इसके होने से बच सकते हैं
आप प्रयास करें कि आप स्वयं होटल के रिसेप्शन काउंटर तक चलकर पहुंचे ताकि आपका कुछ पैसे की बचत हो पाए यदि आप खुद से होटल ढूंढने में असमर्थ है तो आप वहां पर आसपास खड़े लड़कों से जो होटल लगाने के लिए खड़े होते हैं उनके थ्रू भी आप रूम बुक करवा सकते हैं जिसमें ज्यादा नहीं 100 200 रुपए का ज्यादा अंतर आ सकता है
होटल वालों से आप चेकिंग एवं चेक आउट का टाइम क्लीयरली बात कर ले ज्यादातर यहां पर यह होता है कि चेक और टाइम दिन के 11:00 तक का ही होता है एवं आप मंदिर में दर्शन करने के लिए चल जाते हैं तो ज्यादातर उधर से लौटते समय लेते हो जाने के वजह से आपको दिन के 1 से 2:00 जाते हैं तो फिर होटल वाले आपसे मन मांगी पैसे मांग सकते हैं यदि आपको अगले दिन कमरा खाली करना हो तो आप होटल वाले से बात कर ले एवं 11:00 आप चेक आउट करके और अपनी सामान वहां के रिसेप्शन काउंटर पर रख सकते हैं
: वृंदावन पहुंचने के बाद आप सर्वप्रथम अपने दिन का रूटीन सेट करें की सबसे पहले आप किस मंदिर जाए और कैसे-कैसे दर्शन करें कि समय में किस मंदिर तक पहुंचना जरूरी है ज्यादातर लोगों को सभी मंदिर का समय एवं आसपास की दूरी की सही जानकारी नहीं होने की वजह से वह बेवजह बहुत परेशान हो जाते हैं जैसे कि बिहारी जी की मंदिर एवं राधा बल्लभ जो की मंदिर पास पास है लेकिन बहुत से लोग बिहारी जी मंदिर जाने के बाद वहां से वापस प्रेम मंदिर जाते हैं एवं प्रेम मंदिर में दर्शन करने के बाद पुनः वापस वहां से फिर राधा वल्लभ मंदिर के लिए जाते हैं
ऐसा ही राधा रमन मंदिर और निधिवन के बीच की दूरी मात्र 100 मीटर है लेकिन लोगों को सही जानकारी नहीं होने की वजह से राधा रमन मंदिर में दर्शन करने के बाद कई सारे लोग प्रेम मंदिर या फिर दूसरे मंदिर चले जाते हैं एवं वाहन दर्शन करने के बाद पुनः वापस निधन के लिए जाते हैं सर्वप्रथम आप एक दिन पहले ही रात में अगले दिन की पूरी रूटिंग एवं टाइम टेबल सेट कर ले ताकि आप बहुत कम समय में बिना कोई परेशानी के सभी मंदिर का दर्शन कर सकते हैं
बहुत सारे लोगों को मंदिर का खुलने एवं बंद होने की सही समय की जानकारी नहीं होने की वजह से मंदिर बंद होने के समय में वह पैदल चलकर मंदिर पहुंच जाते हैं एवं वहां उन्हें दो से तीन घंटा इंतजार करना पड़ता है एक बात का विशेष ध्यान रखें कि निधिवन मंदिर को छोड़कर ज्यादातर मंदिर दिन के 12:00 के आसपास बंद होते हैं एवं पुणे दोपहर के 4:00 बजे के बाद खुलते हैं इस बीच में आप निधिवन की दर्शन कर सकते हैं या फिर दिन का भोजन करके अपने होटल पर आराम करें
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वृंदावन पहुंचने के बाद महाराज जी की दर्शन करना सभी लोगों की पहली पसंद होती है पर अब केली कुंज आश्रम में महाराज जी के दर्शन दीक्षा सत्संग एवं सभी के नियम बदल चुके हैं आप लोगों के बातों में ना आकर के केली कुंज आश्रम के बाहर इंक्वारी काउंटर पर से ही सही जानकारी ले बहुत सारे लोगों को सही जानकारी नहीं होने की वजह से वह पूरी रात परिक्रमा मार्ग पर अगले दिन की सुबह महाराज जी की पैदल यात्रा के इंतजार में बैठे रहते हैं इसलिए आप किसी भी प्रकार की महाराज जी से जुड़ी जानकारी इंक्वारी काउंटर से ही ले
वृन्दावन की परिकर्मा से जुड़ी जानकारी के लिए ये पढ़े
वृंदावन की परिक्रमा कितने किलोमीटर की है और परिक्रमा कहां से शुरू की जाती है
आप यदि वृंदावन आ रहे हैं तो आप वृंदावन पहुंचने के बाद हर संभव प्रयास करें कि आप वृंदावन पहुंचने पर वृंदावन की परिक्रमा जरूर लगाए वृंदावन की परिक्रमा 12 किलोमीटर की है वृंदावन की परिक्रमा लगाने से आपको सभी मंदिरों के दर्शन का फल मिलता है वृंदावन की परिक्रमा लगाने में 3 से 4 घंटे का समय लगभग लगता है परिक्रमा लगाने के लिए सबसे सही समय होता है सुबह के 4:00 से लेकर 7:00 बजे तक परिक्रमा शुरू कर ले या फिर आप शाम के 5:00 से लेकर रात के 8:00 तक परिक्रमा शुरू कर ले
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