प्रेमानंद महराज के गुरु कौन है ? उनकी दर्शन कैसे और कहँ होगी best news 2026

आपको आज पूज्य  प्रेमानंद महराज के गुरु देव के बारे में बताते हैं एवं उनसे जुड़ी सारी जानकारी इस पोस्ट के माध्यम से बताते हैं प्रिय बंधु पूज्य श्री प्रेमानंद  महाराज  के गुरुदेव गौरंगी शरण जी महाराज यानी कि दादा गुरुदेव  जिनका नाम गौरंगी शरण जी महाराज है

पूज्य प्रेमानंद महराज के गुरु दादा गुरुदेव की दर्शन कैसे होती है

उनकी  दर्शन करने के तरीके बेहद आसान है अगर आप वृंदावन आ रहे हैं तो आपको केली कुंज का पता जरूर पता होगा आप केलि कुंज पहुंचने  के बाद वहां से किसी से भी बड़े महाराज जी के पास जाने का रास्ता पूछ सकते हैं जो की राधा वाटिका के नाम से जाना जाता है आप चाहे तो वहां से पैदल भी जा सकते हैं राधा वाटिका और केली कुंज की दूरी मुश्किल से 300 से 400 मीटर की है  आपकी जानकारी के लिए बता दे कि बड़े महाराज जी के दर्शन दिन में दो बार होती है पहली  दर्शन सुबह 9:00 बजे से 9:30 तक होती है एवं दूसरी दर्शन शाम 7:30 से 8:00 तक होती है

प्रेमानंद महराज के गुरु

: गौरंगी शरण जी महाराज के दर्शन के लिए सर्वप्रथम आप राधा  वाटिका पहुंच जाए वहां आप एक चीज का विशेष ध्यान रखें आप अपना मोबाइल फोन साइलेंट रखें एवं आप ज्यादातर मौन रहने का प्रयास करें शोरगुल बिल्कुल ना मचाए क्योंकि  बड़े महाराज जी ज्यादातर मौन  अवस्था में ही रहते हैं सुबह 9:00 बजने के बाद दर्शन प्रारंभ होती है एवं इसके लिए आपको लाइन में लगना पड़ सकता है उनके खास पारिकर आपको दर्शन की सारी नियम एवं तरीके आपको बताते रहेंगे आप हर संभव प्रयास करें कि आपके द्वारा वहां किसी भी प्रकार का कोई भी शोरगुल ना हो

: जब आप बड़े महाराज जी के सामने पहुंचते हैं तो आप किसी भी प्रकार से उन्हें अभिवादन करने की प्रयास न करें ना ही आप किसी भी प्रकार की वहां पर प्रणाम करने की प्रयास करें आप मन ही मान मानसिक रूप से उन्हें प्रणाम करें एवं आगे बढ़ जाए दर्शन करने के पश्चात आप वहां से प्रसाद लेकर बाहर निकल जाए बाहर निकालने के बाद आप चाहे तो वहां से साष्टांग दंडवत या पंचांग दंडवत करके बाहर निकाल सकते है

वृंदावन के किसी भी आश्रम में जाए तो एक बात का आप विशेष ध्यान रखें

केली कुंज राधा वाटिका या अन्य किसी भी आश्रम में आप आश्रम के सेवादारों के आदेश अनुसार ही अपना आचरण करें उन्हें व्यवस्था बनाने में अपना सहयोग किया करें सभी सेवादार आपकी सुविधा के लिए ही वहां खड़े होते हैं आप अन्यथा उनसे कोई किसी भी प्रकार की बहस ना करें

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: संत दर्शन क्यों करें संत दर्शन करने से क्या लाभ मिलता है

: महाराज जी कहते हैं कि जितना संभव हो सके संतों का दर्शन एवं सेवा करना चाहिए क्योंकि संतो के दर्शन से हमारे पूर्व के पापों का नाश होता है एवं हमारा मंगल होना शुरू हो जाता है संतो के दृष्टि मात्र से ही हमारे प्रारंभ नष्ट होना शुरू हो जाता है संतों की  किसी भी प्रकार से आप अभेलना ना करें जब भी आप किसी संतो के दर्शन करते हैं तो आप मन ही मन श्रीजी से प्रार्थना करें कि संतों की विशेष कृपा दृष्टि आप पर पड़ जाए

प्रेमानंद महराज के गुरु

आपसे अगर संतों की सेवा बन पाए तो आप वृंदावन में संतो के लिए सेवा जरूर करें आप चाहे तो उन्हें वस्त्र दान कर सकते हैं कुछ धन अन्य फल इत्यादि भी उन्हें हाथ जोड़कर स्वीकार करने की आग्रह करें इसका बहुत बड़ा फल आपके जीवन में मिलेगा

महाराज जी कहते हैं कि संतो के चरणों की रज  में कृपा वसी होती है लेकिन बहुत सारे संत अपने चरण किसी को छूने नहीं देते हैं तो कृपया आप जबरदस्ती वृंदावन में किसी भी संतों का चरण छूने का प्रयास न करें आप यह ना समझे कि आप जबरदस्ती चरण छू लिए तो आप पर कृपा बरस जाएगी अगर संत आपसे नाराज हो गए तो आपकी बहुत बुरी दुर्दशा हो जाएगी अगर आपको किसी संतों का चरण का रज लेना है तो आप उनके चरण की तरफ मानसिक प्रणाम करें एवं उनके चले जाने के बाद उनका रज लेकर रख ले

 

श्री  प्रेमानंद महराज के गुरु से मिलने कब-कब आते हैं

अक्सर लोगों का यह मन रहता है कि वह महाराज जी के दर्शन कर ने  ऐसे समय पर पहुंचे कि उस समय उन्हें दोनों महाराज जी के दर्शन हो जाए यानि  की प्रेमानंद महाराज जी और दादा गुरुदेव श्री गौरांगी  शरण जी महाराज दोनों के दर्शन एक साथ हो जाए इसके लिए पहले दर्शन बहुत आसान थे क्योंकि पहले प्रेमानंद जी महाराज अपने गुरु से मिलने हर गुरुवार को आया ही करते थे जिससे लोगों को यह पहले से  पता होता था कि बृहस्पतिवार की सुबह 7:00 बजे राधा वाटिका पहुंच जाने से एक साथ दोनों महाराज जी की दर्शन हो जाएगी

प्रेमानंद महराज के गुरु

लेकिन अब कुछ नियम में बहुत बदलाव हो चुके हैं जैसे की अब प्रेमानंद जी महाराज पहले की तरह हर बृहस्पतिवार को अपने गुरुदेव की दर्शन कर ने   नहीं आते हैं अब महाराज जी यमुना विहार कुंज में रहने की वजह से और दादा गुरुदेव के आदेश अनुसार वह महीने में सिर्फ दो बार ही दादा गुरुदेव के के दर्शन करने आते हैं लेकिन इसमें सबसे अलग   वाली बात यह है कि इसमें पहले की तरह पूर्व निर्धारित दिन या कोई तिथि नहीं होती है क्योंकि महाराज जी अब महीना में दो बार कब और किस दिन आएंगे इसका कोई पूर्वानुमान नहीं रहता है बस यह है कि 15 दिन के बाद दूसरी बार आते हैं

 दादा गुरुदेव प्रेमानंद जी महाराज को दीक्षा कब और कैसे दिए

दादा गुरुदेव से दीक्षा लेना यह सुनने में जितना आसान है असल में उतना ही मुश्किल है क्योंकि दादा गुरुदेव किसी को भी इतनी आसानी से दीक्षा नहीं देते हैं यानी कि अपना शिष्य  नहीं बनाते हैं दादा गुरुदेव साधकों को पूरा परिपक्व हो जाने के बाद ही उन्हें दीक्षा देते हैं दादा गुरुदेव ने सर्वप्रथम दीक्षा देके  सबसे पहला  शिष्य पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज को ही बनाए थे

प्रेमानंद जी महाराज अपने एक वीडियो में यह बताए हैं कि जब उन्होंने दादा गुरुदेव से दीक्षा देने की बात कही तब दादा गुरुदेव ने उन्हें एकदम से मना कर दिया और उन्हें कह दिए थे कि इस तरह की अगर इच्छा हो तो आगे से मत आना लेकिन प्रेमानंद जी महाराज के विशेष भाव विभोर हो जाने से दादा गुरुदेव ने उन्हें कहा कि यदि तुम राधाबल्लभ मंदिर के महंत से अगर लिखित आदेश ले आओगे  तब हम तुम्हें दीक्षा दे सकते हैं जो की महाराज जी ने ठीक ऐसा ही किया और जब महाराज जी ने लिखित आजा उन्हें दिखाई तब जाकर दादा गुरुदेव ने पूज्य श्री प्रेमानंद  महाराज को दीक्षा दी थी

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